महराजगंज (प्रशांत त्रिपाठी): उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी से जुड़े चर्चित राहुल मद्धेशिया अपहरण कांड की सुनवाई शुक्रवार को विशेष सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट/एमपी-एमएलए कोर्ट प्रमोद कुमार गिरि की अदालत में हुई। मामले में 14वें साक्षी की गवाही होनी थी, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। गवाह की गैरहाजिरी के चलते साक्ष्य की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जिसके बाद अदालत ने शेष साक्ष्य के लिए 18 सितंबर की तारीख नियत की है।
करीब ढाई दशक पुराने इस अपहरण कांड में अब तक 13 साक्षियों के बयान अदालत में दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें घटना के वक्त बस्ती शहर में तैनात तत्कालीन कोतवाल राजेंद्र सिंह, पीड़ित राहुल मद्धेशिया के भाई कृष्ण मुरारी मद्धेशिया, सुपुर्दगी के गवाह शिवा, पूर्व सीओ अविनाश मिश्र, संजय, शमशेर बहादुर सिंह और एसटीएफ के हेड कांस्टेबल योगेंद्र सिंह समेत अन्य गवाह शामिल हैं। मामले में गवाही की प्रक्रिया तेज करने के लिए अदालत की ओर से नोटिस जारी किए गए थे और अनुपस्थित रहने वाले कुछ गवाहों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हुए थे। अदालत की इस सख्ती के बाद गवाहों की पेशी में तेजी आई थी। माना जा रहा है कि अब शेष गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ने की उम्मीद है।
2001 में एसटीएफ ने अमरमणि के आवास से की थी बरामदगी-
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 6 दिसंबर 2001 की सुबह करीब 7:45 बजे बस्ती शहर के जयपुरवा रोडवेज तिराहे के पास से व्यवसायी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल मद्धेशिया का अपहरण कर लिया गया था। जांच के दौरान लखनऊ एसटीएफ की टीम ने अपहृत राहुल को पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के आवास से बरामद किया था। इस मामले में वादी धर्मराज मद्धेशिया की तहरीर पर बस्ती कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के दौरान वादी धर्मराज मद्धेशिया का निधन हो चुका है।
पूर्व मंत्री को घोषित किया जा चुका है भगोड़ा-
इस चर्चित अपहरण कांड में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी लगातार अदालत में पेश होने से बचते रहे, जिसके बाद न्यायालय से उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अदालत के आदेश पर उनकी संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई भी की गई थी। इस मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी न्यायिक प्रक्रिया जारी है। विचारण के दौरान एक आरोपी की मृत्यु भी हो चुकी है।