लखनऊ (आनन्द श्रीवास्तव)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अपनी यात्रा निकाल चुके हैं और पूरी सक्रियता से जुटे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। अन्य राजनीतिक दल भी लगातार प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं और जमीन पर उतर चुके हैं। चुनावी सरगर्मियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव आखिर कब होंगे? क्या चुनाव पहले कराए जाएंगे या इनमें थोड़ी देर होगी?
यह सवाल इसलिए भी उलझा हुआ है क्योंकि इस बार केवल चुनाव ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े मसले भी एक साथ सामने आ रहे हैं। इनमें एक तरफ उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षाएं हैं, तो दूसरी तरफ उसी दरमियान सेंसस (जनगणना) का कार्य भी हो सकता है। विधानसभा चुनाव अपने आप में एक बहुत बड़ी प्रक्रिया है जिसमें भारी अमला और तंत्र लगता है। ऐसे में इन तीनों प्रक्रियाओं के बीच समन्वय कैसे बनेगा, यह मुख्य सवाल है। अब बोर्ड परीक्षाओं का शेड्यूल सामने आने के बाद चुनावी समय को लेकर चर्चाएं और कयास तेज हो गए हैं।
संवैधानिक स्थिति और 5 राज्यों का कार्यकाल
दरअसल, उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में कराना संवैधानिक बाध्यता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल भले ही 22 मई 2027 को पूरा हो रहा है, लेकिन इसके साथ जुड़े अन्य चार राज्यों—मणिपुर, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड—की विधानसभाओं का कार्यकाल क्रमशः 13 मार्च, 16 मार्च, 14 मार्च और 28 मार्च को पूरा हो रहा है। जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश का चुनाव बाकी राज्यों से अलग कराने का निर्णय शायद ही ले। ऐसे में पांचों राज्यों का चुनाव 13 मार्च से पहले संपन्न कराने की संवैधानिक बाध्यता बनती है।
बोर्ड परीक्षा और मतदान की तारीखों में समन्वय
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 5 फरवरी से 24 फरवरी के बीच आयोजित होंगी। इसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे थे कि चुनाव मार्च-अप्रैल में हो सकते हैं, लेकिन आयोग से जुड़े लोग इससे सहमत नजर नहीं आते, क्योंकि वर्ष 2022 में भी यूपी समेत पांचों राज्यों के चुनाव एक साथ ही कराए गए थे।
माध्यमिक शिक्षा विभाग का कहना है कि उच्च स्तर से बातचीत के बाद ही बोर्ड परीक्षा की तिथियां तय की गई हैं। लिहाजा माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अपना कार्यक्रम इस प्रकार तैयार करेगा जिससे परीक्षा और मतदान की तारीखें आपस में न टकराएं। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि जिस दिन बोर्ड की परीक्षाएं न हों, उन तारीखों के बीच मतदान कराया जा सकता है।
क्या कम चरणों में होगा मतदान?
साल 2022 में उत्तर प्रदेश में 8 जनवरी को आचार संहिता लगी थी और चुनाव 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच कुल सात चरणों में संपन्न हुए थे। इस बार भी समय सीमा कुछ ऐसी ही रह सकती है, लेकिन एक चर्चा यह भी है कि सात चरणों के चुनाव को इस बार कम चरणों में समेटा जा सकता है। पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों में भी चरणों की संख्या धीरे-धीरे कम करने के प्रयास हुए हैं। उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है और राजनीतिक पार्टियां स्वाभाविक तौर पर प्रचार के लिए पर्याप्त समय चाहती हैं, लेकिन वर्तमान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई बड़ी दिक्कत नजर नहीं आती। ऐसे में कम चरणों में चुनाव कराकर प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराने का विकल्प भी देखा जा रहा है।
हालांकि, चुनाव फरवरी में परीक्षाओं के बीच होंगे, मार्च में होंगे, कम चरणों में होंगे या अन्य राज्यों से अलग होंगे—इस पूरे मामले पर अंतिम और आधिकारिक फैसला केवल चुनाव आयोग का ही होगा।