‘यूपी पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की फटकार’ वाली खबर पर बुलंदशहर SSP बोले, कहा- लिखित आदेश में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं

बुलंदशहर। बुलंदशहर के खुर्जा में हुई एक सड़क दुर्घटना के मामले को लेकर हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर चलायी जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही खबरों में बताया जा रहा है कि कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “पुलिस पर भरोसा कैसे करें? क्यों न यूपी पुलिस को भंग कर सीबीआई जांच कराई जाए।”

इन तमाम वायरल खबरों पर अब बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दिनेश कुमार सिंह ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है।

 

 

 

‘लिखित आदेश में नहीं है कोई टिप्पणी’
एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में चल रही खबरों को ‘तथ्यों से परे और भ्रामक’ करार दिया है। उन्होंने आग्रह किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 30 सितंबर 2026 के लिखित आदेश का अवलोकन किया जाए। एसएसपी ने स्पष्ट किया, “माननीय न्यायालय द्वारा अपने लिखित आदेश में कहीं भी इस प्रकार की कोई (पुलिस को भंग करने या फटकार लगाने संबंधी) टिप्पणी नहीं की गई है। दो अलग-अलग प्रकरणों को एक साथ मिलाकर भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं।”

क्या था एफआईआर का पूरा मामला?
सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में चल रही खबरों में कहा जा रहा था कि सड़क दुर्घटना (19 अगस्त 2026) के बाद आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया था, फिर भी पुलिस ने एफआईआर ‘अज्ञात’ के नाम से दर्ज की।

इस पर एसएसपी ने स्पष्ट किया कि 19 अगस्त की दुर्घटना (मु.अ.सं.- 915/26) में वादिनी को सामान्य चोटें आई थीं। उन्होंने बताया, “वादिनी द्वारा अपने हाथ से जो लिखित तहरीर थाने में दी गई थी, उसमें किसी भी व्यक्ति या वाहन का नाम नहीं था। पुलिस जो भी एफआईआर दर्ज करती है, वह वादिनी की तहरीर के कंटेंट के आधार पर ही करती है। पुलिस अपनी तरफ से एफआईआर में कोई एंट्री नहीं कर सकती, क्योंकि इससे एफआईआर की शुचिता (पवित्रता) प्रभावित होती है।”

आरोपी के खिलाफ हुई है नियमानुसार कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना के तुरंत बाद पीआरवी (डायल 112) ने आरोपी को अपने साथ ले लिया था। उसी दिन उसकी पहचान और पते की तस्दीक करते हुए विवेचना के दौरान उसे नए कानून (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस तामील कराया गया। पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई पूरी कर इस मामले में चार्जशीट (आरोप पत्र) भी माननीय न्यायालय में प्रेषित कर दी है।

2021 के एक अन्य मामले का भी किया जिक्र
एसएसपी ने यह भी बताया कि इस घटना को 2021 के एक अन्य मामले (मु.अ.सं.-55/21) के साथ जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है। 2021 का मामला खुर्जा नगर में धारा 452, 323, 504, 506, और 354 के तहत दर्ज हुआ था, जिसकी विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

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