श्रीलंका को बर्बाद करने पर तुला चीनः हंबनटोटा पर कब्जे के बाद अब नया दांव, 125 मिलियन रुपए का लगाया चूना
International Desk: कर्ज के बोझ तले दबे श्रीलंका में चीन की भूमिका लगातार विवादों में घिरती जा रही है। पहले कर्ज के बदले हंबनटोटा बंदरगाह का नियंत्रण हासिल करने और अब उसी बंदरगाह का संचालन करने वाली चीनी कंपनी पर 125.9 मिलियन श्रीलंकाई रुपए के टैक्स बकाया का आरोप लगने से बीजिंग की निवेश नीति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह का संचालन करने वाली चीनी कंपनी हंबनटोटा इंटरनेशनल पोर्ट ग्रुप (HIPG) पर नगरपालिका कर (Assessment Tax) का 12.59 करोड़ श्रीलंकाई रुपए (125.9 मिलियन LKR) से अधिक बकाया होने का आरोप लगा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, हंबनटोटा म्युनिसिपल काउंसिल ने बकाया कर की वसूली के लिए कंपनी को पहले रेड नोटिस जारी किया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि भुगतान नहीं होने पर श्रीलंकाई कानून के तहत संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। चीनी पोर्ट प्रबंधन कंपनी ने नगर परिषद की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी। अदालत से मिले अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल परिषद की जब्ती संबंधी कार्रवाई पर रोक लगी हुई है। इसके बाद नगर परिषद ने मामले की पैरवी के लिए एक निजी कानून फर्म नियुक्त की।
हंबनटोटा बंदरगाह पहले भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र रहा है। श्रीलंका द्वारा चीनी ऋण का भुगतान करने में कठिनाई आने के बाद इस बंदरगाह का संचालन दीर्घकालिक लीज के तहत चीनी कंपनी को सौंपा गया था। इसके बाद से यह परियोजना चीन की विदेश निवेश नीति और तथाकथित “कर्ज कूटनीति (Debt Diplomacy)” पर होने वाली बहस का प्रमुख उदाहरण मानी जाती रही है। ताजा टैक्स विवाद के बाद श्रीलंका में चीनी निवेश, स्थानीय कर भुगतान और सार्वजनिक परियोजनाओं में विदेशी कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। हालांकि, टैक्स बकाया से जुड़े आरोपों पर संबंधित चीनी कंपनी की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


