हिंदू समाज फूहड़ संस्कृति से बचे, सनातन धर्म के खिलाफ महिलाओं को कतई न घसीटे-सतीश त्रिपाठी

नौतनवा। आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी जड़ों से कटते जा रहे हैं। सोशल मीडिया और पाश्चात्य चकाचौंध के नाम पर फूहड़ता को संस्कृति बताया जा रहा है, जो हमारे सनातन मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है। सनातन धर्म ने हमेशा ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ का मंत्र दिया है। जहाँ नारी का सम्मान है, वहीं देवता निवास करते हैं। उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार सतीश त्रिपाठी ने कही है।

उन्होंने कहा कि आज गैर हिंदू एवं सनातनी धर्मावलंबियों द्वारा तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित कर हिंदू एवं सनातन धर्म की महिलाओं को आगे करके भौड़ी संस्कृति मे धकेली जा रही है। जो एक विदेशी कुचक्र है। इस विदेशी कुचक्र को आज सभी को समझना होगा। जिस तरह आज गैर धर्मावलम्बी सनातन धर्म पर कुठाराघात कर रहे हैं क्या वे धर्मावलंबी अपने पर्व एवं त्योहार में क्या अपनी धर्म की महिलाओं को ऐसी संस्कृति में उतार कर आखिर क्यों वाह-वही नहीं लूट रहे ? आश्चर्य की बात तो यह है कि समाज का ठेका लेने वाले कुछ तथाकथित जनप्रतिनिधि सनातनी परंपरा के विरुद्ध ऐसे कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराकर वाह-वाह करने में भी जरा सा भी शर्म महसूस नहीं करते।

हमारे धर्मग्रंथों, वेदों और पुराणों में महिला को शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती का रूप माना गया है। किसी भी वैचारिक मतभेद या विवाद में महिलाओं को घसीटना, उन पर अभद्र टिप्पणी करना सनातन संस्कार नहीं, बल्कि आसुरी प्रवृत्ति है। सनातन धर्म सदा से मर्यादा और संयम पर आधारित रहा है। महिलाओं का सम्मान ही समाज की प्रगति का आधार है।

युवा पीढ़ी से मेरा विशेष आह्वान है। रील और व्यूज के लिए फूहड़ता मत परोसो। महिलाओं द्वारा भौड़ी संस्कृति वाले कार्यक्रम प्रस्तुत न किए जाए । इसके लिए समाज में जन जागरूकता अभियान चलाई जाए। ताकि लोग अपनी संस्कृति को समझें। धोती-कुर्ता, साड़ी, तिलक, भजन-कीर्तन में शर्म नहीं, गर्व है। जो समाज अपनी संस्कृति भूल जाता है, उसका भविष्य अंधकार में चला जाता है। सनातन का अर्थ ही है – जो शाश्वत है, जो कभी पुराना नहीं होता। उसे आधुनिकता के नाम पर बदनाम करना बंद करो।

हिंदू सनातनी धर्मावलंबियों द्वारा यह संकल्प लिया जाय कि क्षेत्र में सांस्कृतिक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्कूल-कॉलेजों में संस्कार आधारित कार्यक्रम, रामायण-गीता पाठ और मातृशक्ति सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। समाज के प्रबुद्ध लोगों से अपील है कि फूहड़ संस्कृति का बहिष्कार करें और सनातन के मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों।

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