नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच भारत में घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक राहत भरी खबर आई है। मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाला एलपीजी (LPG) मालवाहक जहाज सिमी (Symi) रविवार की सुबह गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पर सफलतापूर्वक डॉक कर गया है। यह जहाज 13 मई 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज(Strait of Hormuz) से होकर गुजरा था। पश्चिम एशिया में पिछले 75 से अधिक दिनों से जारी युद्ध के कारण यह समुद्री मार्ग पूरी तरह से बाधित और असुरक्षित बना हुआ है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से खरीदे गए इस जहाज पर लगभग 20,000 टन लिक्विड प्रोपेन और ब्यूटेन (रसोई गैस) लदा है। जहाज पर सवार सभी 21 विदेशी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। अमेरिकी नाकेबंदी और ओमान की खाड़ी में ईरानी नौसेना के कड़े पहरे के बीच इस जहाज को सुरक्षित निकालने के लिए उन्नत रणनीतिक पैंतरेबाजी का सहारा लेना पड़ा।
कैसे दिया ईरान-अमेरिका को चकमा
बुधवार को कॉम्बैट जोन से गुजरते समय जहाज ने रडार की नजरों से बचने के लिए अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर्स को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। इस रणनीति के तहत जहाज रडार-निगरानी वाले युद्ध क्षेत्रों को चकमा देकर ईरान के लारक द्वीप के पूर्व में सुरक्षित रूप से फिर से पहुंच गया।
चार मंत्रालयों के बीच अभूतपूर्व तालमेल
भारत सरकार के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने और जहाज को किसी भी क्रॉसफायर (गोलाबारी) से बचाने के लिए सरकार के भीतर चार मंत्रालयों में जबरदस्त समन्वय देखा गया। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “डीजी शिपिंग, विदेश मंत्रालय (MEA), रक्षा मंत्रालय (MoD), और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच चौबीसों घंटे चले निर्बाध समन्वय के कारण ही इस जहाज का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित हो पाया है।”
‘सिमी’ मार्च की शुरुआत से अब तक इस खतरनाक समुद्री बाधा को पार करने वाला 13वां भारत जहां है, जो कि भारत पहुंचा है। इसके ठीक पीछे वियतनाम के ध्वज वाला एक और एलपीजी टैंकर एनवी सनशाइन (NV Sunshine) आ रहा है, जो 46,427 टन ईंधन लेकर न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।
भारत के घटते LPG स्टॉक को मिलेगी संजीवनी
कुकिंग गैस की यह खेप भारत के घरेलू बाजार के लिए संजीवनी की तरह है। पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में पिछले 75 दिनों से जारी व्यवधान के कारण भारत का कुल कच्चे तेल और वाणिज्यिक गैस का भंडार तेजी से घटा है। भारत के राष्ट्रीय भंडार में लगभग 15 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केपलर के अनुसार, युद्ध छिड़ने से पहले भारत के पास 10.7 करोड़ बैरल कच्चा तेल उपलब्ध था, जो अब घटकर 9.1 करोड़ बैरल रह गया है।
राष्ट्रीय भंडार पर बढ़ते इसी दबाव के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने की शुरुआत में नागरिकों से ईंधन बचाने की सार्वजनिक अपील की थी।

