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बिजनौर में जन्म…इलाहाबाद में पढ़ाई, भारतीय संसद में बुजुर्ग हुए डॉ. सुभाष कश्यप, ऐसे ही नहीं कहा जाता था उन्हें संविधान विशेषज्ञ

Subhash C Kashyap: भारतीय लोकसभा के पूर्व महासचिव डाॅ. सुभाष कश्यप का गुरुवार चार जून को 97 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके साथ ही भारतीय संसद के इतिहास, स्मृतियां और संसदीय समझ से जुड़े एक चैप्टर का भी समापन हो गया है. बेशक, भारतीय संसद प्रणाली आम भारतीयों की पहचान है, लेकिन आम भारतीयों के बीच संसद और संसदीय नियमों को पहचान दिलाने में डॉ सुभाष कश्यप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बिजनौर में जन्में और इलाहाबाद में पढ़ाई करने वाले डॉ सुभाष कश्यप संसद के प्रति अपनी इन प्रतिबद्धाओं के चलते संसद में ही बुजुर्ग हुए.

आइए, इसी कड़ी में जानते हैं कि डॉ सुभाष कश्यप कौन थे? उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ ही उनके काम और सम्मान पर एक नजर डालते हैं. कुल जमा उनके निधन के बाद उनके पूरे जीवन पर एक नजर डालते हैं.

बिजनौर में जन्म, छात्र आंदोलन का चेहरा रहे

लोकसभा के पूर्व सचिव डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई, 1929 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में एक स्वतंंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में हुआ था. सुभाष कश्यप की परवरिश बचपन से ही लोकतंत्र और आजादी की मांग के बीच हुई थी, इसका असर उनके जीवन पर पड़ा. नतीजतन, उन्होंने अपने जीवन की किशोरावस्था में ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई. पहले वह बिजनौर तो फिर बाद में वह मेरठ में छात्र आंदोलनों का चेहरा रहे.

इलाहाबाद से पढ़ाई, वकील और पत्रकार के तौर पर शुरू किया करियर

लोकसभा के पूर्व सचिव डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म बेशक बिजनौर में हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी डिग्री इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से हुई. इलाहाबाद में ही उन्होंने एक पत्रकार के तौर पर अपना करियर शुरू किया. इस दौरान उन्होंने एक शिक्षक के तौर पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में भी सेवाएं दी. बाद में उन्होंने एक वकील के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी.

जवानी में नेहरू के साथ संसद में की एंट्री

लोकसभा के पूर्व सचिव डॉ. सुभाष कश्यप साल 1953 में लोकसभा सचिवालय से जुड़े. उस दौरान उनकी उम्र 24 साल थी, तो वहीं ये वह दाैर था, जब पहले आम चुनाव के बाद जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रणाली आकार ले रही थी. यानी नेहरू के साथ ही डॉ. सुभाष कश्यप ने जवानी में संसद में एंट्री ली.

इसके बाद वह लंबे समय तक लोकसभा सचिवालय में सेवाएं देते रहे. डॉ. सुभाष कश्यप को 31 दिसंबर, 1983 लोकसभा सचिवालय का महासचिव नियुक्त किया गया. वह इस पद पर 1990 तक रहे. कुल जमा 1990 तक उन्होंने 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी. 61 साल की उम्र में यानी साल 1990 में उन्होंने इस पद से वॉलियंटरी रिटायरमेंट ले ली.

…पहले भारतीय भी थी

लोकसभा के पूर्व सचिव डॉ. सुभाष कश्यप साल 1983 तक जिनेवा में इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (IPU) के इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन के प्रमुख भी रहे. वह इस पद तक पहुंचने वाले पहले भारतीय थे. इसके अलावा उन्होंने 1965-66 में वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी कांग्रेसनल फेलो के तौर पर काम किया है.

इस वजह से कहा जाता था संविधान विशेषज्ञ, कई नियमों को दिया आकार

लोकसभा के पूर्व सचिव डॉ. सुभाष कश्यप को भारतीय संविधान का विशेषज्ञ कहा जाता था. इसका कारण ये था कि उनके पास संवैधानिक मामलों, संसदीय प्रक्रियाओं, राजनीतिक सुधारों और पंचायती राज व्यवस्था की समृद्ध समझ थी. तो वहीं उन्होंने कई नियमों को आकार भी दिया, जिसके तहत उन्होंने संविधान की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य और उसके ड्राफ्टिंग और एडिटोरियल कमिटी के चेयरमैन के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी. इसके साथ ही वहभारत सरकार के पंचायती राज कानूनों और संस्थाओं के मानद संवैधानिक सलाहकार,वन नेशन, वन इलेक्शन की संभावनाओं पर विचार करने के लिए गठित हाई लेवल कमेटी के सदस्य भी रहे.

100 से अधिक किताबें लिखी, पद्म भूषण से हुए सम्मानित

लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप ने अपने जीवनकाल में 100 से अधिक किताबें और 400 से अधिक शोध पत्र लिखे. उनकी प्रमुख किताबों में’आवर पॉलिटिकल सिस्टम’ और ‘आवर कॉन्स्टिट्यूशन’,’स्टेट ऑफ द नेशन : डेमोक्रेसी, गवर्नेंस एंड पार्लियामेंट’, ‘वी, द पीपल एंड आवर कॉन्स्टिट्यूशन’ और ‘इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन, कॉन्फ्लिक्ट्स एंड कंट्रोवर्सीज’ शामिल है.

वहीं 2016 में उनकी सेवाओं के चलते उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया था. तो वहीं उन्हें 2 बार मोतीलाल नेहरू पुरस्कार, सैन फ्रांसिस्को, साउ पाउलो, ब्राजील की एकेडमी ऑफ ऑनरेरी ऑर्डर की डिग्री से सम्मानित किया गया था.

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