
भारत में कार मॉडिफिकेशन का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. कई लोग अपनी कार को अलग दिखाने के लिए उसमें तरह-तरह के बदलाव करवाते हैं. सड़कों पर तेज आवाज वाले साइलेंसर, डिजाइनर नंबर प्लेट और काले शीशों वाली कारें अब आम हो गई हैं. लेकिन हर मॉडिफिकेशन कानूनी नहीं होता. कई लोकप्रिय बदलाव ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं और इनके कारण भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. अगर आप अपनी कार में बदलाव कराने की सोच रहे हैं या पहले से मॉडिफाइड कार चलाते हैं, तो इन नियमों को जानना जरूरी है.
1. मॉडिफाइड साइलेंसर
कई लोग कार से स्पोर्टी और तेज आवाज निकालने के लिए साइलेंसर बदलवाते हैं. हालांकि तय सीमा से ज्यादा शोर करने वाले साइलेंसर गैरकानूनी हैं. ऐसे मामलों में ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है.
2. फैंसी नंबर प्लेट
स्टाइलिश फॉन्ट, कलर बैकग्राउंड या डिजाइनर नंबर प्लेट लगवाना कई कार मालिकों को पसंद आता है. लेकिन सरकार की ओर से तय मानकों से अलग नंबर प्लेट लगाना नियमों के खिलाफ है और इसके लिए जुर्माना लगाया जा सकता है.
3. तेज आवाज वाले हॉर्न
प्रेशर हॉर्न, एयर हॉर्न और म्यूजिकल हॉर्न जैसी चीजें कई लोग अपनी कार में लगवा लेते हैं. लेकिन ये हॉर्न शोर प्रदूषण बढ़ाते हैं और कानूनन प्रतिबंधित हैं. ऐसे हॉर्न लगे होने पर वाहन मालिक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
4. काले शीशे और सन फिल्म
गोपनीयता और धूप से बचाव के लिए कई लोग कार के शीशों पर काली फिल्म लगवाते हैं. हालांकि कई मामलों में यह नियमों के खिलाफ माना जाता है. जांच के दौरान पकड़े जाने पर जुर्माना भरना पड़ सकता है.
5. बुल बार और क्रैश गार्ड
SUV मालिक अक्सर अपनी गाड़ी को ज्यादा दमदार दिखाने के लिए बुल बार या क्रैश गार्ड लगवाते हैं. लेकिन सुरक्षा नियमों के अनुसार यह मॉडिफिकेशन मंजूर नहीं है. दुर्घटना की स्थिति में इससे खतरा बढ़ सकता है, इसलिए सार्वजनिक सड़कों पर इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित है.
कार में बदलाव कराने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह मॉडिफिकेशन मोटर वाहन नियमों के अनुसार वैध है या नहीं. थोड़ी सी जानकारी आपको अनावश्यक जुर्माने और कानूनी परेशानी से बचा सकती है.
ये भी पढ़ें- दिल्ली में ट्रैफिक नियम हुए सख्त, 45 दिन में निपटारा नहीं तो ऑटो-एक्शन

