नकली जुर्माना पर्चियों से चल रहा संगठित खेल-
नौतनवा/महराजगंज (मसूद उर्फ शमशेर खान की रिपोर्ट)। जनपद के नौतनवा ब्लॉक क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसके चलते क्षेत्र की बेशकीमती वन संपदा को भारी क्षति पहुँच रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभाग के कुछ लोगो की मिलीभगत से तस्कर सागौन और फलदार आम के पेड़ों की खुलेआम कटान कर रहे हैं। तस्करी का यह खेल इतने व्यवस्थित ढंग से चल रहा है कि वैध परमिट की आड़ लेकर बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटान की जा रही है।
प्रतिबंधित पेड़ों पर कुल्हाड़ी और फर्जीवाड़े का खेल
क्षेत्र में एक से दो फीट तक मोटी सागौन की लकड़ियां बिना किसी अवरोध के काटी जा रही हैं। इसके साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण फलदार आम के पेड़ों को भी निशाना बनाया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कटान को कानूनी जामा पहनाने के लिए मौके पर ‘नकली जुर्माना पर्चियों’ का सहारा लिया जा रहा है। यह फर्जीवाड़ा न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि एक गहरी आंतरिक सांठगांठ की ओर भी संकेत करता है।
संगठित हब और विरोध करने पर टकराव
नौतनवा ब्लॉक के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में तस्करों ने अपने विशेष “हब” स्थापित कर लिए हैं, जहाँ से पूरा अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तस्करों का नेटवर्क इतना प्रभावशाली है कि किसी भी प्रकार के विरोध पर वे हिंसक रूप अपना लेते हैं और झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। तस्करों के इस बढ़ते दुस्साहस के कारण स्थानीय स्तर पर भय का वातावरण है और अवैध कटान पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पर्यावरण को क्षति और जवाबदेही पर सवाल
लकड़ी तस्करी की इन गतिविधियों से न केवल सरकार को राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि क्षेत्रीय पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुँच रही है। किसानों के फलदार वृक्षों और सरकारी वन संपदा की इस लूट ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारी इस गंभीर प्रकरण संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं या इसी तरह यह खेल इसी तरह चलता रहेगा।

