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बचत का उपदेश देकर नाकामियों का बोझ जनता पर, कांग्रेस का पीएम मोदी पर तीखा हमला

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बढ़ोतरी को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा। खरगे ने कहाकि बचत का उपदेश देकर अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को 90 पैसे प्रति लीटर की और वृद्धि की गई। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इस वृद्धि के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपए प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत अब 90.67 रुपए प्रति लीटर के मुकाबले 91.58 रुपए प्रति लीटर हो गई है।

 

एक्स पर लिखी पोस्ट
खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि दाम बढ़े चार ही दिन हुए कि मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम फिर बढ़ा दिए। पूरी भूमिका बनाकर, बचत का उपदेश देकर अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता की लूट और अडाणी को अमेरिका से छूट प्रधानमंत्री मोदी का कंप्रोमाइज्ड मॉडल है। उन्होंने कहाकि विश्वगुरु का झूठा दंभ भरने वाले मोदी जी ने अमेरिका से हाथ-पैर जोड़कर रूसी तेल खरीदने की अनुमति की एक महीने की मोहलत ली है। हर बार ऐसा करके वह 140 करोड़ भारतीय नागरिकों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि किसी भी पिछली सरकार ने ऐसा नहीं किया है।

दूरदर्शिता और नेतृत्व की कमी
खरगे ने कहाकि अब सवाल है कि जब सरकार के हिसाब से हमें ये अनुमति मिल गई है तो फिर आम जनता पर पेट्रोल-डीज़ल के दामों का बोझ क्यों? उन्होंने कहाकि मैं एक बार फिर दोहराता हूं कि भाजपा में दूरदर्शिता और नेतृत्व की कमी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि जब संकट आया तो प्रधानमंत्री चुनावों में व्यस्त रहे, फिर चिकनी-चुपड़ी बातें कर ‘लूट का प्लान’ बनाया और इसी बीच अपने परम मित्र को भी छुड़वा लिया।

 

प्रायोजित पीआर से विश्वगुरु नहीं बनते
खरगे ने कहाकि केवल विदेशों में प्रायोजित पीआर करने से ‘विश्वगुरु’ नहीं बना जाता। मोदी जी, जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी पड़ती है। असली सवालों से मत भागिए, इन्हें आपके ‘आम कैसे खाते हैं’ और ‘टॉनिक कौन सा पीते हैं’, जैसे सवालों से कोई मतलब नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहाकि अगर जवाब देंगे कि संकट के लिए खुद क्या कर रहे हैं, तभी जनता के असली ‘प्रधान सेवक’ कहलाएंगे, वरना महज प्रचारक बनकर ही रह जाएंगे। 

 

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