
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में मजबूत प्रदर्शन किया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही और पूरे वर्ष के जीडीपी आंकड़े जारी किए. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) बढ़कर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 प्रतिशत थी.
ताजा आंकड़े भले ही राहत देने वाले हों, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं.
चौथी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन
जनवरी से मार्च 2026 के बीच यानी FY26 की चौथी तिमाही (Q4) में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी. यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के अनुमान से बेहतर रहा. ब्लूमबर्ग सर्वे में 7.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगय़या था. हालांकि पिछली तिमाही (Q3) में विकास दर 8 प्रतिशत थी, लेकिन चौथी तिमाही का प्रदर्शन भी मजबूत माना जा रहा है.
पीएम मोदी ने GDP की तारीफ की
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके कहा भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए FY 2025-26 में 7.7% GDP ग्रोथ दर्ज की है, जबकि Q4 में यह 7.8% रही. यह आंकड़े देश की आर्थिक मजबूती, सुधारों के प्रभाव और 140 करोड़ भारतीयों के परिश्रम को दर्शाते हैं.
Indias growth momentum remains strong!
GDP growth rate of 7.7% in FY 2025-26 and 7.8% in Q4 of FY 2025-26 reflect the inherent strength of our economy, the success of reforms and the hard work of 140 crore Indians.
We shall leave no stone unturned to further Ease of Living,
— Narendra Modi (@narendramodi) June 5, 2026
क्यों बदला गया GDP का आधार वर्ष
भारत अब GDP की नई सीरीज (New GDP Series) के आधार पर आर्थिक आंकड़े जारी कर रहा है. इसमें 2022-23 को नया आधार वर्ष (Base Year) बनाया गया है. सरकार का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद उपभोग के तरीकों में आए बदलाव, डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार और नए आर्थिक स्रोतों को बेहतर तरीके से शामिल करने के लिए यह बदलाव किया गया है.
किन क्षेत्रों ने दी अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ी ताकत?
विशेषज्ञों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की आर्थिक वृद्धि को सबसे ज्यादा सहारा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से मिला. इन दोनों क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार दी और विकास दर को ऊंचा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. EY इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10.7 प्रतिशत, व्यापार, परिवहन और संबंधित सेवाओं में 11 प्रतिशत और वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट क्षेत्र में 10.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. इन क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों ने रोजगार, आय और कारोबार को बढ़ावा दिया, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली.
खपत और निवेश ने भी बढ़ाया विकास का इंजन
भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि के पीछे घरेलू मांग का भी बड़ा योगदान रहा. FY26 में प्राइवेट कंजम्प्शन 7.7 प्रतिशत बढ़ा, जो दिखाता है कि लोगों ने खर्च बढ़ाया और बाजार में मांग मजबूत बनी रही. वहीं, निवेश में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए आगे आईं. मजबूत खपत और निवेश किसी भी अर्थव्यवस्था की सेहत के लिए सकारात्मक संकेत माने जाते हैं. हालांकि निर्यात की तुलना में आयात अब भी अधिक रहा, लेकिन दोनों के बीच का अंतर पहले के मुकाबले कुछ कम हुआ है.
आगे की राह में कई चुनौतियां
मजबूत विकास दर के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हैं. सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर है. ईरान से जुड़े संकट और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव का असर वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी महंगाई, व्यापार घाटे और आर्थिक विकास पर दबाव डाल सकती है. इसके अलावा महंगाई का जोखिम, कमजोर मानसून की आशंका, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और दुनिया भर में वित्तीय परिस्थितियों का सख्त होना भी ऐसे कारण हैं, जो आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं.
RBI ने FY27 के लिए घटाया विकास अनुमान
इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है. RBI के अनुमान के अनुसार FY27 की पहली तिमाही में 6.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि रह सकती है. RBI का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है.
कुल मिलाकर तस्वीर क्या कहती है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, FY26 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत साल साबित हुआ है. 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी. मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, घरेलू खपत और निवेश ने विकास को नई रफ्तार दी. हालांकि आगे का रास्ता पूरी तरह आसान नहीं है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया का संकट, महंगाई और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं आर्थिक रफ्तार पर असर डाल सकती हैं.
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