लखनऊ (प्रशांत त्रिपाठी की रिपोर्ट): लखनऊ में अधिवक्ताओं के साथ हुई हालिया घटना को लेकर अधिवक्ता समाज में नाराजगी और चिंता का माहौल बना हुआ है। इस मामले पर लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ता अंशुमान कुमार कन्नौजिया ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो अधिवक्ता दिन-रात कानून, संविधान और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय में खड़े रहते हैं, उन्हीं को अपमान और अव्यवस्था का सामना करना पड़े, यह पूरे न्याय तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस घटना की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि निर्दोष अधिवक्ताओं को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशील और सकारात्मक कदम उठाने की भी मांग की।
‘अधिवक्ता और पुलिस दोनों व्यवस्था के अहम अंग’
अंशुमान कुमार कन्नौजिया ने कहा कि अधिवक्ता और पुलिस दोनों ही व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच सम्मान और संवाद बना रहना चाहिए, टकराव की स्थिति किसी भी पक्ष के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कहा,
“जिस अधिवक्ता की आवाज न्यायालय में गूंजती है, उसी आवाज से हजारों लोगों को न्याय मिलता है।”
अधिवक्ता ने कहा कि आज देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नई सड़कें बन रही हैं, आधुनिक थाने तैयार हो रहे हैं और सरकारी भवनों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है, लेकिन अधिवक्ता समाज के मन में आज भी यह सवाल है कि न्यायालयों और न्याय के लिए लड़ने वालों का विकास आखिर कब होगा।
‘अधिवक्ता केवल पेशेवर नहीं, न्याय की उम्मीद होते हैं’
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल काला कोट पहनने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह उस गरीब की उम्मीद होता है जिसे न्याय चाहिए। वह उस बेगुनाह की आवाज होता है जिसे कानून से इंसाफ चाहिए और वह संविधान की ताकत होता है जो लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार, गरीबों को न्याय, शिक्षा और समानता जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अदालतों ने ऐतिहासिक फैसले दिए हैं और उन मामलों को न्यायालय तक पहुंचाने का काम अधिवक्ताओं ने ही किया।
अंशुमान कुमार कन्नौजिया ने कहा कि एक अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल के लिए नहीं लड़ता, बल्कि समाज और संविधान के अधिकारों के लिए खड़ा रहता है।
न्यायालय परिसरों की व्यवस्था पर उठाए सवाल
उन्होंने देशभर के न्यायालय परिसरों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज भी कई न्यायालय परिसरों में हजारों अधिवक्ता टिन शेड और अस्थायी व्यवस्थाओं में बैठकर काम करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड के बावजूद अधिवक्ता रोज न्यायालय पहुंचता है, क्योंकि उसके लिए यह केवल पेशा नहीं बल्कि न्याय की सेवा है।
अधिवक्ता ने कहा कि यह केवल लखनऊ का मुद्दा नहीं है, बल्कि देशभर के न्यायालय परिसरों और अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा विषय है।
‘न्याय व्यवस्था मजबूत होगी तो लोकतंत्र भी मजबूत होगा’
अंशुमान कुमार कन्नौजिया ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब देश के हर क्षेत्र में विकास संभव है, तो न्यायालय परिसरों में आधुनिक व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए सम्मानजनक चेंबर, स्वच्छ न्यायालय परिसर और बेहतर सुविधाओं की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि यह केवल अधिवक्ताओं की सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि उस न्याय व्यवस्था के सम्मान का विषय है जिस पर पूरे देश का विश्वास टिका हुआ है।
उन्होंने कहा,
“जब अधिवक्ता सम्मानित होगा, तभी न्याय व्यवस्था मजबूत होगी और जब न्याय व्यवस्था मजबूत होगी, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।”

