कुछ लोगों की सफलता की कहानी सिर्फ कहानी नहीं होती बल्कि दूसरों के लिए वो प्रेरणा भी बन जाती है. आपने ऐसे कई एस्पिरेंट्स के बारे में सुना होगा या देखा होगा, जो सालों से UPSC की तैयारी में जुटे हुए हैं और कई बार एग्जाम भी दे चुके हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई. वहीं, कुछ ऐसे भी हैं, जो अपनी असफलता से जल्दी सीख जाते हैं और फिर अगले ही प्रयास में एग्जाम क्रैक कर देते हैं. प्रियंका मोहिते भी उन्हीं में से एक हैं, जिन्होंने महज 23 साल की उम्र में अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर लिया और आईपीएस अधिकारी बन गईं. आइए जानते हैं IPS प्रियंका मोहिते की सक्सेस स्टोरी के बारे में.
दिलचस्प बात ये है कि प्रियंका मोहिते ने अपनी विरासत को भी सम्मानित किया है. दरअसल, उनके दादा एक पुलिस जमादार थे और उनकी कहानियां सुन-सुनकर ही वो बड़ी हुईं और फिर एक दिन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 595वीं रैंक हासिल बड़ी पुलिस अधिकारी बन गईं. भारतीय पुलिस सेवा तक का उनका सफर दृढ़ता, त्याग और अटूट विश्वास की कहानी है.
बहन MBBS तो भाई कर रहे UPSC की तैयारी
आईपीएस प्रियंका मोहिते का पैतृक गांव मालेगांव का पोहाणे है. उनके पिता सुरेश मोहिते एक स्कूल में शिक्षक हैं, उनकी बड़ी बहन एमबीबीएस हैं और मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं. वहीं, उनके भाई ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली है और वो भी यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं.
नवोदय विद्यालय से हुई है 12वीं तक की पढ़ाई
अगर प्रियंका की पढ़ाई की बात करें तो उनकी शुरुआती पढ़ाई यानी कक्षा 1 से 5वीं तक की शिक्षा स्वामी मुक्तानंद स्कूल से हुई है और उसके बाद एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से उनका चयन खेडगांव के जवाहर नवोदय विद्यालय में हो गया. फिर उन्होंने कक्षा 6 से 12वीं तक नवोदय विद्यालय में ही पढ़ाई की. कक्षा 12वीं में उनका विषय साइंस था, लेकिन चूंकि उनका लक्ष्य यूपीएससी परीक्षा पास करना था, इसलिए प्रियंका आगे की पढ़ाई के लिए पुणे चली गईं, जहां उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए किया. प्रियंका ने यूजीसी-नेट परीक्षा भी पास की है और उन्हें जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) भी प्राप्त किया है.
गलतियों से सीखकर क्रैक किया एग्जाम
प्रियंका ने यूपीएससी की तैयारी तो की थी, लेकिन कम की थी, जिसका नतीजा ये हुआ कि वो अपने पहले प्रयास में फेल हो गईं. हालांकि उन्होंने अपनी इस गलती से सीखा और फिर जमकर तैयारी की. उसके बाद उन्होंने दूसरा प्रयास दिया और न सिर्फ इंटरव्यू तक पहुंचीं बल्कि एग्जाम में सफल भी हुईं. उनका चयन आईपीएस अधिकारी के रूप में हुआ. फिलहाल वह महाराष्ट्र कैडर में तैनात हैं.

