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JEE Advanced: लाखों छात्रों का ‘डेटा लीक’ दावा निकला भ्रामक, IIT रुड़की ने दी सफाई, कहा- नहीं हुआ कोई ब्रीच

Jee advanced: लाखों छात्रों का ‘डेटा लीक’ दावा निकला भ्रामक, iit रुड़की ने दी सफाई, कहा- नहीं हुआ कोई ब्रीच

सोशल मीडिया पर ऐसी कई पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि जेईई एडवांस्ड परीक्षा में डेटा लीक हुआ है और लाखों छात्रों की डिटेल लीक हो गई है. हालांकि अब आईआईटी रुड़की ने इस मामले में अपनी सफाई दी है और लाखों JEE एडवांस्ड कैंडिडेट्स पर असर डालने वाले डेटा ब्रीच और प्राइवेसी वायलेशन के दावों को गलत करार दिया है. IIT रुड़की ने इन दावों को ‘गुमराह करने वाला और गलत’ बताया है. संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है, जिसमें लिखा है, ‘गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है, जो सच्चाई से कोसों दूर है’.

संस्थान ने कहा, ‘जेईई (एडवांस्ड) के लाखों उम्मीदवारों को प्रभावित करने वाले डेटा लीक और निजता उल्लंघन के दावे भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं’. हालांकि आईआईटी रुड़की ने ये जरूर स्वीकार किया है कि 2 जून को क्लाउड स्टोरेज कंपोनेंट में एक अस्थायी गड़बड़ी हुई थी, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि घटना का तुरंत पता चल गया था, एक एथिकल हैकर ने इसकी सूचना दी थी और फिर इसे तुरंत ठीक कर दिया गया था. संस्थान ने स्पष्ट रूप से इस बात से इनकार किया है कि कोई भी संवेदनशील डेटा बड़े पैमाने पर निकाला गया था या परीक्षा परिणामों पर किसी भी तरह से इसका कोई प्रभाव पड़ा था.

कब हुई थी मामले की शुरुआत?

आईआईटी रुड़की के मुताबिक, इस घटना की शुरुआत 2 जून को हुई थी, जब एडमिट कार्ड डेटा तक पहुंचने में उम्मीदवारों को कठिनाई का सामना करना पड़ा था. इसके बाद तुरंत इस परेशानी को ठीक करने के लिए कुछ टेक्निकल काम किए गए, लेकिन इससे अनजाने में ही क्लाउड स्टोरेज में ‘मामूली और अस्थायी त्रुटि’ पैदा हो गई. इस त्रुटि का पता एथिकल हैकर राइलेन अनिल ने लगाया और आईआईटी रुड़की को इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वो संबंधित डेटाबेस तक पहुंच सकते हैं. आईआईटी रुड़की ने कहा कि ये सूचना मिलते ही इस समस्या को तुरंत ठीक कर दिया गया और डेटा तक पहुंच को बिना किसी देरी के प्रतिबंधित कर दिया गया.

IIT रुड़की ने डेटा ब्रीच को बताया कम गंभीर

संस्थान ने डेटा स्टोरेज की तकनीकी प्रकृति का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह डेटा ब्रीच जितना बताया जा रहा है, उससे कहीं कम गंभीर था. संस्थान ने कहा कि प्रभावित स्टोरेज रीड-ओनली था, जिसका मतलब है कि इसमें कोई डेटा एडिट या हटाया नहीं जा सकता था. क्लाउड एक्सेस लॉग के विश्लेषण से पुष्टि हुई कि कोई बल्क डाउनलोड नहीं हुआ था और रीड-ओनली एक्सेस डेटा के 0.05 प्रतिशत से भी कम तक सीमित था. संस्थान ने कहा कि कोई भी संवेदनशील जानकारी लीक या बड़े पैमाने पर निकाली नहीं गई.

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब देश नीट यूजी 2026 के पेपर लीक, सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर विवाद और आधिकारिक वेबसाइट्स को निशाना बनाने वाले साइबर अटैक से जूझ रहा है. ऐसे में इसने सामूहिक रूप से उच्च स्तरीय परीक्षाओं को आधार देने वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे की सिक्योरिटी के बारे में चिंता बढ़ा दी है.

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