लखनऊ: नए वर्ष की शुरुआत के साथ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें सरकार और संगठन से जुड़े कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
बैठक में हाल ही में नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी भी रही। सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बदलाव को लेकर विचार-विमर्श किया गया। बताया जा रहा है कि पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा, जिसके बाद संगठन में भी व्यापक स्तर पर फेरबदल संभव है।
संगठन और सरकार में संतुलन पर चर्चा
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किन नेताओं को संगठन में समायोजित किया जाए और किन्हें सरकार में जिम्मेदारी दी जाए। इस प्रक्रिया में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया। वर्तमान में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पूर्वांचल क्षेत्र से हैं, ऐसे में पश्चिम यूपी, अवध और बुंदेलखंड को प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
इस बैठक में संगठन महामंत्री धर्मपाल भी मौजूद रहे। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम निर्णय दिल्ली स्तर पर लिया जाना है। जानकारी के अनुसार, जनवरी के पहले सप्ताह में इस संबंध में घोषणा हो सकती है, जबकि शपथ ग्रहण समारोह मकर संक्रांति के बाद आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी, संघ से भी परामर्श
बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी शामिल रहे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी राय लिए जाने की जानकारी सामने आई है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। वह जाट समुदाय से आते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस समाज का प्रभावी प्रतिनिधित्व माना जाता है। ऐसे में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर सामाजिक संतुलन का संदेश देने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही संभावित कैबिनेट विस्तार में समाजवादी पार्टी के पीडीए नैरेटिव को संतुलित करने की तैयारी पर भी चर्चा हुई है।

