लखनऊ: सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को राजधानी लखनऊ में यूपी कैबिनेट की बैठक हुई और इसमें जमीनों की रजिस्ट्री से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव को मिली मंजूरी के मुताबिक, अब प्रदेश में कोई भी संपत्ति बेचने से पहले विक्रेता के नाम और दस्तावेजों का मिलान खतौनी में किया जाएगा। अगर नाम सही है, तभी रिजस्ट्री होगी अन्यथा नहीं। नाम का मिलान ना होने पर मामले की जांच की जाएगी। यह फैसला रजिस्ट्री प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को रोकने और पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाने के मकसद से लिया गया है।
मंगलवार को लखनऊ में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी। हालांकि, इनमें सबसे अहम फैसला जमीन रजिस्ट्री को लेकर रहा। उत्तर प्रदेश सरकार में स्टांप, कोर्ट फीस और रजिस्ट्रेशन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि यह प्रस्ताव स्टांप और रजिस्ट्री विभाग की तरफ से आया था, जिसे कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
खतौनी से होगा दस्तावेजों का मिलान
कैबिनेट फैसले के मुताबिक, यूपी में अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों का मिलान खतौनी से किया जाएगा। सत्यापन होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सत्यापन के लिए रिवेन्यू रिकॉर्ड भी चेक किए जाएंगे। अगर दस्तावेजों का मिलान खतौनी से नहीं होता है, तो रिवेन्यू विभाग इसकी जांच करेगा।
क्या है कैबिनेट के इस फैसले का मकसद
सरकार के इस फैसले के पीछे मकसद है कि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा ना हो पाए। इसके अलावा प्रॉपर्टी खरीदने वाले का पैसा पूरी तरह सुरक्षित तरीके से सही हाथों में ही जाए। सरकार का यह फैसला फर्जी रजिस्ट्री करने वाले भूमाफियाओं पर नकेल कसेगा। साथ ही जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पारदर्शी होगी।

