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Iran Kuwait Clash: ईरान जंग में उलझे कुवैत की जमीन धीरे-धीरे क्यों घट रही है?

इंटरनेशनल डेस्क: कुवैत स्थित फैलाका द्वीप की जमीन धीरे-धीरे कम होती जा रही है. इसका कारण न तो ईरान है और न ही उसका पड़ोसी देश इराक. जो रिपोर्ट मिली है, उसके मुताबिक अरब सागर के बढ़ते जलस्तर की वजह से फैलाका द्वीप की जमीन समंदर में मिल रही है, जिसके कारण कुवैत की सरकार और भूगोलविद परेशान हैं. कहा जा रहा है कि आने वाले समय में इस द्वीप का 33 प्रतिशत हिस्सा पानी में मिल जाएगा. अभी इस द्वीप की कुल क्षेत्रफल 46 वर्ग किलोमीटर है.

बीबीसी अरबी के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से पानी की ऊंचाई लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण फैलाका द्वीप की जमीन धंस रही है और धीरे-धीरे घट रही है.

पहले कुवैत और फैलाका द्वीप के बारे में जानिए

कुवैत फारस की खाड़ी पर स्थित एक मुल्क है, जिस पर पहले ब्रिटेन का कंट्रोल था. 1961 में कुवैत एक स्वतंत्र मुल्क बन गया. वर्तमान में कुवैत अमेरिका का सहयोगी देश है और यहां की रक्षा व्यवस्था पर वाशिंगटन का प्रभाव है. कुवैत का कुल क्षेत्रफल 17,818 वर्ग किमी है.

2025 के आंकड़ों के मुताबिक कुवैत की जनसंख्या करीब 50 लाख है. यहां अधिकांश अरबी कबाइली लोग रहते हैं. फैलाका भी कुवैत के पास ही स्थित है. 46 वर्ग किमी वाले इस द्वीप को कुवैत का ऐतिहासिक द्वीप माना जाता है. इस द्वीप का इतिहास 2000 साल पुराना है.

कुवैत टूरिज्म के हिसाब से भी इस द्वीप का काफी महत्व है. बसंत ऋतु के दौरान कुवैत के लोग यहां घूमने जाते हैं. इस द्वीप के पास एक नदी भी है, जिसके कारण यहां का पारिस्थितिक तंत्र कुवैत के अन्य हिस्सों से काफी अलग है.

धीरे-धीरे कैसे खत्म हो रहा है फैलाका द्वीप?

रिपोर्ट के मुताबिक, फैलाका द्वीप के आसपास समुद्र का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. 1990 से अब तक यह जलस्तर लगभग 9 सेंटीमीटर बढ़ चुका है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यहां का जलस्तर 25 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप द्वीप की लगभग 7 प्रतिशत भूमि प्रभावित होकर कम हो सकती है.

इसी तरह, वर्ष 2100 तक द्वीप की करीब 31 प्रतिशत भूमि के नुकसान की आशंका जताई गई है. पिछले कुछ वर्षों में भी लगभग 2 वर्ग किलोमीटर भूमि के कम होने का अनुमान लगाया गया है. वर्ष 1990 में फैलाका द्वीप का कुल क्षेत्रफल लगभग 48 वर्ग किलोमीटर था, जो अब घटकर करीब 46 वर्ग किलोमीटर रह गया है.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े कुवैती भूविज्ञानी और शोधकर्ता डॉ. जसीम अल-बन्नाई के अनुसार, यदि समुद्र का जलस्तर 1 मीटर तक बढ़ जाता है, तो द्वीप की लगभग 25 प्रतिशत भूमि जलमग्न हो सकती है.

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